पूर्व मंत्री राजेश मूणत के नेतृत्व में निकली कांवड़ यात्रा; मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, डॉ. रमन सिंह और सांसद बृजमोहन अग्रवाल समेत जनप्रतिनिधियों ने उठाई कांवड़*
रायपुर, 23 अगस्त 2026। राजधानी रायपुर में रविवार को विशाल कांवड़ यात्रा निकाली गई। रायपुर पश्चिम के विधायक एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री राजेश मूणत के नेतृत्व में आयोजित यात्रा में करीब 10 हजार कांवड़ियों ने हिस्सा लिया। करीब 13 किलोमीटर की यात्रा लगभग छह घंटे में पूरी हुई। महादेव घाट पहुंचकर शिवभक्तों ने बाबा हटकेश्वरनाथ महादेव का जलाभिषेक किया और प्रदेश की सुख-समृद्धि, शांति तथा जनकल्याण की कामना की।
एक समान परिधान में कांवड़ लेकर चल रहे शिवभक्तों के साथ डमरू और ढोल की गूंज तथा “हर-हर महादेव” और “बोल बम” के जयघोष से पूरा यात्रा मार्ग गूंजता रहा। यात्रा के रास्ते में बड़ी संख्या में श्रद्धालु और नागरिक मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री से लेकर सांसद तक ने उठाई कांवड़
विशाल कांवड़ यात्रा में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, रायपुर लोकसभा सांसद बृजमोहन अग्रवाल, विधायक मोतीलाल साहू, विधायक पुरंदर मिश्रा, विधायक सुनील सोनी और रायपुर नगर निगम की महापौर मीनल चौबे सहित अनेक जनप्रतिनिधि, सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधि और गणमान्य नागरिक शामिल हुए।
मुख्यमंत्री, विधानसभा अध्यक्ष, सांसद और अन्य जनप्रतिनिधियों ने स्वयं कांवड़ उठाकर शिवभक्तों के साथ यात्रा में कदम बढ़ाए। जनप्रतिनिधियों से लेकर सामान्य श्रद्धालुओं तक सभी एक समान परिधान और एक ही जयघोष के साथ आगे बढ़ते नजर आए। इससे यात्रा सामाजिक समरसता और सामूहिक आस्था का बड़ा उत्सव बन गई।
21 पंडितों के वैदिक मंत्रोच्चार से हुआ कांवड़ पूजन
यात्रा की शुरुआत मारुति मंगलम, गुढ़ियारी से हुई। इससे पहले विधि-विधान से कांवड़ पूजन और भगवान भोलेनाथ का अभिषेक किया गया। भिलाई के कान्हा जी महाराज के सान्निध्य में 21 पंडितों की टीम ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच कांवड़ का पूजन कराया और मारुति मंगलम में स्थापित शिवलिंग का अभिषेक किया।
इस अनुष्ठान के लिए छत्तीसगढ़ की पांच नदियों का पवित्र जल लाया गया था। मंत्रोच्चार और शंखध्वनि के बीच जल का पूजन किया गया। इसके बाद हजारों श्रद्धालुओं ने कांवड़ उठाई और बाबा हटकेश्वरनाथ के जलाभिषेक के संकल्प के साथ यात्रा शुरू की।
15 दिन की तैयारी, 500 सेवादारों ने संभाली व्यवस्था
इतने बड़े आयोजन को सफल बनाने के लिए राजेश मूणत और उनकी टीम करीब 15 दिन पहले से तैयारियों में जुटी थी। कांवड़ियों के लिए एक समान परिधान, पूजन, प्रसादी, यात्रा संचालन, स्वागत और अन्य व्यवस्थाओं को चरणबद्ध तरीके से तैयार किया गया।
यात्रा की व्यवस्था में करीब 500 सेवादारों की अलग-अलग टीमें सक्रिय रहीं। सुबह से ही मारुति मंगलम, गुढ़ियारी में कांवड़ियों के लिए प्रसादी की व्यवस्था की गई थी। यात्रा पूरी होने और बाबा हटकेश्वरनाथ के अभिषेक के बाद महादेव घाट में भी श्रद्धालुओं के लिए प्रसादी रखी गई।
40 चौक-चौराहों पर स्वागत, पुष्पवर्षा से हुआ अभिनंदन
करीब 13 किलोमीटर के यात्रा मार्ग पर लगभग 40 चौक-चौराहों पर सामाजिक और धार्मिक संस्थाओं, विभिन्न संगठनों तथा राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं ने स्वागत द्वार और पंडाल लगाए।
जगह-जगह कांवड़ियों के लिए प्रसादी और सेवा की व्यवस्था की गई। कई स्थानों पर पुष्पवर्षा हुई, तो कुछ जगहों पर बुलडोजर से फूलों की वर्षा कर शिवभक्तों का भव्य स्वागत किया गया।
बच्चों, युवाओं, महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों की बड़ी संख्या में मौजूदगी ने पूरे मार्ग को उत्सव स्थल में बदल दिया। यात्रा के आगे बढ़ने के साथ नागरिकों का हुजूम भी बढ़ता गया और चारों ओर हर-हर महादेव के जयघोष गूंजते रहे।
देशभर के कलाकारों ने बांधा समां
इस बार कांवड़ यात्रा में धार्मिक आस्था के साथ देश की सांस्कृतिक विविधता भी देखने को मिली। उत्तर प्रदेश की महाकाल-अघोरी और महाकाली टीम, दिल्ली की महाकाल अघोरी टीम, विशाल नंदी, केरल का भरतनाट्यम, ट्रेडिशनल बैंड, तांबूलम डांस, टाइगर डांस और कांतारा प्रस्तुति, उज्जैन की डमरू महाकाल सवारी तथा महाराष्ट्र के सुप्रसिद्ध नागपुर ढोल ने श्रद्धालुओं का उत्साह बढ़ाया।
इसके अलावा खड़गपुर की मां काली टीम और ओडिशा के कटप्पा ग्रुप, दुलदुली बाजा और घंटा धुमाल ने भी अपनी प्रस्तुतियां दीं।
छत्तीसगढ़ की लोक-सांस्कृतिक छटा भी यात्रा में दिखाई दी। अंबिकापुर-कोरबा की अघोरी टीम, बेंद्री के लोक कलाकारों की शिव परिवार प्रस्तुति, दुर्ग की गौरी कृपा धुमाल, भिलाई की धन्नू धुमाल, रायपुर की राधा रानी धुमाल, महाकाल-अघोरी टीम और पारंपरिक नृत्य दलों ने यात्रा में रंग भर दिया।
शिव परिवार से राम दरबार तक दिखीं धार्मिक झांकियां
कांवड़ यात्रा में शिव परिवार, राम-सीता, हनुमान वानर सेना, बाहुबली हनुमान, परशुराम, जामवंत, गणेश, सुग्रीव, भोलेबाबा और महाकाल सहित कई धार्मिक स्वरूपों की झांकियां आकर्षण का केंद्र रहीं।
इसके साथ राम-सीता दरबार, शिव परिवार, चार बग्घियां, लाइव सिंगिंग, लाइव ऑर्केस्ट्रा, मुकुट हनुमान, महाकाल सवारी और त्रिशूल झांकी भी यात्रा में शामिल रही। डमरू की गूंज, ढोल की थाप, अघोरी स्वरूप और धार्मिक झांकियों के बीच आगे बढ़ता हजारों कांवड़ियों का कारवां राजधानी की सड़कों पर आकर्षण का केंद्र बना रहा।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा- कांवड़ के हर कदम में भक्ति, सेवा और लोकमंगल
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने विशाल कांवड़ यात्रा की भव्यता और जनसहभागिता की सराहना करते हुए कहा कि भगवान भोलेनाथ की आराधना केवल पूजा-पद्धति नहीं, बल्कि त्याग, तपस्या, सेवा, समरसता और लोककल्याण की भावना का प्रतीक है।
उन्होंने कहा कि हजारों शिवभक्तों को एक समान भाव, एक समान परिधान और एक संकल्प के साथ कांवड़ उठाकर बाबा हटकेश्वरनाथ के दरबार की ओर बढ़ते देखना भावविभोर करने वाला है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कांवड़ यात्रा में हजारों लोगों का एक साथ चलना सामाजिक और सांस्कृतिक एकता का सुंदर उदाहरण है। यहां कोई छोटा-बड़ा नहीं है, सभी शिवभक्त हैं और सभी के हृदय में महादेव के प्रति समान श्रद्धा है। उन्होंने कहा कि यही सनातन संस्कृति की शक्ति है, जो समाज को जोड़ती है और सेवा तथा सद्भाव का मार्ग दिखाती है।
उन्होंने यात्रा मार्ग पर सामाजिक और धार्मिक संगठनों द्वारा लगाए गए पंडाल, प्रसादी और पुष्पवर्षा को छत्तीसगढ़ की सेवा, आतिथ्य और सामाजिक समरसता की परंपरा का उदाहरण बताया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नई पीढ़ी जब ऐसे आयोजनों में शामिल होती है तो वह धार्मिक परंपराओं के साथ सेवा, अनुशासन, सामूहिकता और सांस्कृतिक विरासत के संस्कार भी ग्रहण करती है। विभिन्न राज्यों से आए कलाकारों और झांकियों को उन्होंने ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ की भावना का प्रतीक बताया।
उन्होंने छत्तीसगढ़ की पांच पवित्र नदियों के जल से बाबा हटकेश्वरनाथ के अभिषेक को पावन अवसर बताते हुए प्रदेशवासियों के सुख, शांति, समृद्धि और आरोग्य की कामना की। साथ ही राजेश मूणत, सेवादारों, सामाजिक संगठनों और सभी सहयोगियों को आयोजन के लिए शुभकामनाएं दीं।
डॉ. रमन सिंह बोले- यह आस्था की अविरल धारा है
विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कांवड़ यात्रा को सनातन संस्कृति, सामूहिक श्रद्धा और सामाजिक समरसता का विराट स्वरूप बताया। उन्होंने कहा कि भारत की शक्ति उन जीवंत परंपराओं में है, जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी संस्कार, आस्था और जीवन-मूल्यों का संचार करती हैं।
उन्होंने कहा कि जब हजारों श्रद्धालु कंधे पर कांवड़ लेकर कई किलोमीटर चलते हैं तो उनके कदम सिर्फ किसी गंतव्य की ओर नहीं बढ़ते, बल्कि वे आस्था, साधना और आत्मानुशासन के मार्ग पर आगे बढ़ते हैं।
डॉ. सिंह ने युवाओं, महिलाओं और परिवारों की व्यापक सहभागिता को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि नई पीढ़ी जब माता-पिता और वरिष्ठजनों के साथ ऐसे आयोजनों में शामिल होती है, तभी संस्कारों की श्रृंखला आगे बढ़ती है।
उन्होंने कहा कि 13 किलोमीटर की यात्रा में हजारों कांवड़ियों का अनुशासन, सैकड़ों सेवादारों की सेवा और करीब 40 चौक-चौराहों पर विभिन्न वर्गों द्वारा किया गया स्वागत बताता है कि यह आयोजन केवल कांवड़ियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे रायपुर का उत्सव बन गया।
विभिन्न राज्यों से आए कलाकारों और झांकियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि अलग-अलग प्रदेशों की लोककलाएं, वेशभूषाएं और सांस्कृतिक परंपराएं जब एक ही शिवभक्ति के भाव में एकत्र होती हैं तो भारत की विविधता में एकता का वास्तविक स्वरूप दिखाई देता है।
बृजमोहन अग्रवाल बोले- रायपुर की सामाजिक एकता और सनातन चेतना का उत्सव
रायपुर लोकसभा सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि राजधानी रायपुर ने भगवान भोलेनाथ के प्रति अपनी अटूट श्रद्धा का अद्भुत स्वरूप प्रस्तुत किया है। हजारों श्रद्धालुओं का एक समान परिधान में कांवड़ लेकर हर-हर महादेव और बोल बम के जयघोष के साथ बाबा हटकेश्वरनाथ के दरबार की ओर बढ़ना दिव्य अनुभूति कराने वाला दृश्य है।
उन्होंने कहा कि सनातन संस्कृति की सबसे बड़ी विशेषता समाज को जोड़ना है। कांवड़ यात्रा में न कोई छोटा है, न बड़ा और न ही किसी पद या वर्ग का भेद। सभी का एक ही परिचय है—शिवभक्त।
राजेश मूणत बोले- यात्रा की असली तैयारी शिवभक्तों के हृदय में होती है
आयोजन के नेतृत्वकर्ता राजेश मूणत ने कहा कि यात्रा की तैयारियां करीब 15 दिन पहले शुरू की जाती हैं, लेकिन इसकी वास्तविक तैयारी व्यवस्थाओं में नहीं, बल्कि शिवभक्तों के हृदय में होती है।
उन्होंने कहा कि जब एक समान परिधान में हजारों कांवड़िये कंधे पर कांवड़ लेकर निकलते हैं तो जाति, वर्ग, पद और परिचय के सारे भेद पीछे छूट जाते हैं और सिर्फ एक पहचान रह जाती है कि सभी भोलेनाथ के भक्त हैं।
मूणत ने कहा कि करीब 10 हजार कांवड़ियों को बाबा हटकेश्वरनाथ के चरणों की ओर बढ़ते देखकर वे अभिभूत हैं। 13 किलोमीटर के मार्ग पर करीब 40 स्थानों पर सामाजिक संगठनों और नागरिकों ने जिस आत्मीयता से स्वागत किया, प्रसादी बांटी और पुष्पवर्षा की, उससे यह यात्रा पूरे रायपुर की यात्रा बन गई है।
उन्होंने कहा कि देश के विभिन्न राज्यों से आए कलाकारों और झांकियों के माध्यम से श्रद्धालुओं को शिवभक्ति के साथ भारत की सांस्कृतिक विविधता के दर्शन कराने का प्रयास किया गया। अलग-अलग भाषाएं, वेशभूषाएं और कलाएं थीं, लेकिन भाव एक ही था—हर-हर महादेव।
मूणत ने कहा कि छत्तीसगढ़ की पांच पवित्र नदियों का जल लेकर बाबा हटकेश्वरनाथ का अभिषेक करना अत्यंत भावपूर्ण क्षण रहा। इस दौरान छत्तीसगढ़ की खुशहाली, रायपुर की प्रगति और प्रत्येक परिवार के मंगल की प्रार्थना की गई।
उन्होंने 500 सेवादारों, सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों, कार्यकर्ताओं और राजधानीवासियों का आभार जताते हुए कहा कि इस विराट आयोजन का श्रेय किसी एक व्यक्ति को नहीं, बल्कि उन हजारों हाथों को है जिन्होंने सेवा की और उन हजारों हृदयों को है जिनमें महादेव के प्रति अटूट श्रद्धा है।
छह घंटे बाद बाबा हटकेश्वरनाथ के चरणों में पहुंचा आस्था का कारवां
सुबह मारुति मंगलम, गुढ़ियारी से वैदिक मंत्रोच्चार के बीच शुरू हुई कांवड़ यात्रा करीब छह घंटे बाद महादेव घाट पहुंची। लगभग 13 किलोमीटर की यात्रा पूरी करने के बाद करीब 10 हजार शिवभक्तों ने बाबा हटकेश्वरनाथ महादेव का जलाभिषेक किया।
यात्रा की थकान के बावजूद श्रद्धालुओं के चेहरों पर भक्ति, संतोष और आध्यात्मिक आनंद साफ नजर आया। पूरे आयोजन में एक समान परिधान, कंधों पर कांवड़, अधरों पर हर-हर महादेव का जयघोष और हृदय में बाबा हटकेश्वरनाथ के प्रति श्रद्धा दिखाई दी।
एक समान परिधान… कंधों पर कांवड़… अधरों पर हर-हर महादेव… और सड़कों पर उमड़ा आस्था का समुद्र। रायपुर की यह विशाल कांवड़ यात्रा राजधानी के धार्मिक और सांस्कृतिक जीवन में एक यादगार अध्याय जोड़ गई।
