रायपुर। पत्रकारों को अभिव्यक्ति के खतरे न उठाने पड़ें या कम से कम उठाने पड़ें, इस बात की कोशिश रहेगी। यह बात मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार पंकज झा ने रायपुर प्रेस क्लब की नई कार्यकारिणी के शपथ ग्रहण समारोह में मुख्यअतिथि के रूप में कही। वरिष्ठ पत्रकार दिवाकर मुक्तिबोध ने नई कार्यकारिणी को शपथ दिलाई। प्रफुल्ल ठाकुर ने अध्यक्ष, संदीप शुक्ला ने उपाध्यक्ष, वैभव शिव पांडेय ने महासचिव, रमन हलवाई ने कोषाध्यक्ष, अरविंद सोनवानी व तृप्ति सोनी ने संयुक्त सचिव के रूप में शपथ ली। प्रफुल्ल ठाकुर ने कहा कि रायपुर प्रेस क्लब का एक गौरवशाली इतिहास रहा है। एक ऊंचाई रही है। हमारी कोशिश रहेगी कि हम उस ऊंचाई को छू सकें। इसके लिए आप सभी के सहयोग और मार्गदर्शन की आवश्यकता रहेगी। प्रेस क्लब की परंपराओं को पुनर्जीवित करेंगे। सबको साथ लेकर चलेंगे। कोशिश होगी कि रायपुर ही नहीं, पूरे प्रदेश के पत्रकारों को साथ लेकर चलें। पत्रकार बहुत सी समस्याओं का सामना करते रहते हैं। हम मिलकर उनका सामना करेंगे। केके शर्मा ने कहा कि नई कार्यकारिणी को वरिष्ठ लोगों के अनुभवों का लाभ लेना चाहिए। वे नए लोगों को उनकी ताकत से परिचित कराएंगे। जैसे हनुमान को उनकी शक्ति के बारे में जामवंत ने बताया था। उन्होंने कहा कि पत्रकारों की हर समस्या के समाधान के लिए मैं प्रेस क्लब के साथियों के साथ खड़ा नजर आऊंगा। पूर्व अध्यक्ष त्रिराज साहू ने कहा कि नई कार्यकारिणी अपनी घोषणाओं पर अमल करे। वरिष्ठजनों से संवाद बनाए रखे। बड़े नेताओं को, बड़ी हस्तियों को प्रेस क्लब में आमंत्रित करे। उनसे विचार साझा करे। इससे प्रेस क्लब की गरिमा बढ़ेगी। उमेश मिश्रा ने कहा कि आज के आयोजन में पत्रकारों की एकता दिखाई दे रही है। यह एकता आपको दूर तक ले जाएगी। दुनिया की बहुत सारी समस्याओं के लिए मीडिया पहली और आखिरी उम्मीद है। इस उम्मीद को बचाकर रखना आपकी जिम्मेदारी है। राजेश जोशी ने कहा कि नई पीढ़ी प्रेस क्लब की गौरवशाली परंपराओं को आगे बढ़ाए। निर्धारित मापदंडों के अनुरूप चले। बेहतर काम करेंगे तो दोबारा चुनकर आ जाएंगे। प्रकाश शर्मा ने कहा कि प्रेस क्लब को मनोरंजन के साधन जुटाना चाहिए लेकिन साथ ही इसे एक बौद्धिक केंद्र के रूप में विकसित करना चाहिए। आसिफ इकबाल ने कहा कि एक कार्यकारिणी के लिए एक साल का समय कम होता है। इसे दो साल किया जाना चाहिए। बृजेश चौबे ने कहा कि निर्धारित कार्यकाल का पालन करना चाहिए। यह मर्यादा तोड़ने पर कार्रवाई तय होनी चाहिए। उन्होंने भी नई कार्यकारिणी को हरसंभव मदद देने की बात कही। रामअवतार तिवारी ने कहा कि अच्छा काम करने से जगह खुद बनती है। सम्मान मिलता है। दिवाकर मुक्तिबोध ने अपने पिता की पंक्तियों को उद्धरित करते हुए कहा कि आज अभिव्यक्ति के खतरे अधिक प्रबल हैं। पर उम्मीद है कि हम इनका सामना करते हुए आगे बढ़ेंगे। उन्होंने याद किया कि रायपुर में दो मौकों पर कर्फ्यू के दौरान जब ड्यूटी कर रहे पत्रकारों के साथ दुर्व्यवहार हुआ तो वरिष्ठजनों ने शासकीय समाचारों का बहिष्कार करवा दिया। इसके बाद प्रशासनिक अधिकारियों ने क्षमा मांगी। यह पत्रकारों की एकता के कारण संभव हुआ। उन्होंने उम्मीद जताई कि नई कार्यकारिणी यह एकता कायम रखेगी। कार्यक्रम का संचालन रजनी ठाकुर ने किया।