- मरीन ड्राइव रायपुर में मनाया राष्ट्रीय वैज्ञानिक चेतना दिवस
रायपुर। एक बच्चा जब जन्म लेता है तो वह विज्ञाननिष्ठ होता है लेकिन उसे ऐसी परवरिश दी जाती है, उसके प्रश्न पूछने पर डांटा जाता है, इस वजह से वह बड़ा होकर अंधविश्वासी बन जाता है। एक व्यक्ति को अंधविश्वासी बनाने में बड़ी मेहनत करनी पड़ती है अगर उसकी परवरिश सहज की जाए तो देश में कोई भी व्यक्ति अंधविश्वासी नहीं रहेगा। अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति रायपुर के अध्यक्ष डॉ दिनेश मिश्रा ने राष्ट्रीय वैज्ञानिक चेतना दिवस के अवसर पर कही। तेलीबांधा तालाब, मरीन ड्राइव पर जन संगठनों ने यह दिवस मनाया।
छत्तीसगढ़ में वैज्ञानिक सोच के प्रचार प्रसार के लिए कार्यरत छत्तीसगढ़ तर्कशील परिषद, अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति रायपुर, छत्तीसगढ़ ब्रेकथ्रू साइंस समिति एवं छत्तीसगढ़ विज्ञान सभा ने संयुक्त रूप से इसे आयोजित किया था। डॉ नरेंद्र दाभोलकर के शहादत दिवस 20 अगस्त को प्रतिवर्ष पूरे भारत में राष्ट्रीय वैज्ञानिक चेतना दिवस के रूप में मनाया जाता है। 2013 में इस दिन डॉ नरेंद्र दाभोलकर की हत्या कर दी गई थी।
कुछ स्वार्थी लोग अंधविश्वास फैलाते हैं
आम लोगों के बीच आयोजित इस कार्यक्रम की शुरुआत में छत्तीसगढ़ विज्ञान सभा के अध्यक्ष विश्वास मेश्राम ने इस आयोजन के उद्देश्य पर प्रकाश डाला। एक दर्शक द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि निहित स्वार्थ के लोग नहीं चाहते कि देश में स्प्रिट ऑफ इंक्वायरी में वृद्धि हो। वे लोगों के दिलो दिमाग में अंध विश्वास फैलाकर उन्हें मानसिक गुलाम बनाए रखने में अपना हित देखते हैं। यह प्रवृत्ति सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि अन्य देशों में भी दिखाई दे रही है। उन्होंने बताया कि बुद्ध से लेकर रैदास, कबीर, गुरु घासीदास, जोतिबा और सावित्री बाईं फुले, बाबासाहेब अंबेडकर, पेरियार, प्रो मेघनाथ साहा, अवतार सिंह संधू पाश, प्रोफेसर एम एम कलबुर्गी, गोविंद पानसरे, गौरी लंकेश और डॉ नरेंद्र दाभोलकर तक भारत में वैज्ञानिक सोच अपनाने की एक दीर्घकालीन विरासत है। आज हम वैज्ञानिक सोच के प्रचार प्रसार की जरूरत पर बातचीत के लिए एकत्र हुए हैं। हमारे संविधान के आर्टिकल 51 ए ( एच) द्वारा वैज्ञानिक चेतना के प्रचार प्रसार को देश के हर नागरिक का कर्तव्य माना गया है।
युवती को बता दी उसके मन की बात
छत्तीसगढ़ तर्कशील परिषद के अध्यक्ष डॉ रमेश सुखदेवे ने बताया कि किस प्रकार पाखंडी बाबा अंधविश्वास के गर्त में समाज को धकेलते हैं। उन्होंने अंधविश्वास विरोधी चमत्कारों का विज्ञान कार्यक्रम दिखाकर उनके पीछे के वैज्ञानिक सिद्धांत का खुलासा किया। इन चमत्कारों के तहत वहां खड़ी एक युवती के मन की बात बताकर लोगों को चमत्कृत कर दिया।
असहमत होने पर कर दी हत्या
छत्तीसगढ़ ब्रेकथ्रू साइंस सोसायटी की स्टेट कॉर्डिनेटर पूजा शर्मा ने बताया कि यूरोप में ब्रूनो की हत्या सिर्फ इसलिए की गई क्योंकि उसने अंधविश्वास का विरोध किया था और कॉपरनिकस के सिद्धांत की व्याख्या करते हुए यह बताया कि सूर्य पृथ्वी का चक्कर नहीं लगाता बल्कि पृथ्वी ही सूर्य का चक्कर लगाती है। उनकी यह खोज उस समय के धार्मिक विश्वास के विरुद्ध थी ।
शगुन वर्मा, अंजू मेश्राम, रेखा गोंडाने, जीवेश चौबे, संजीव खुदशाह ने अपना उद्बोधन दिया। कार्यक्रम का सफल संचालन छत्तीसगढ़ विज्ञान सभा के अध्यक्ष विश्वास मेश्राम ने किया। छत्तीसगढ़ विज्ञान सभा के सचिव रतन गोंडाने ने धन्यवाद ज्ञापन किया। वैज्ञानिक सोच के प्रचार प्रसार के लिए काम कर रहे शहीद हुए विज्ञान कार्यकर्ताओं को याद करने के लिए आयोजित इस कार्यक्रम में रायपुर के अलग अलग कोने से हरकेश डडसेना, टी के जग्गी, जीवेश प्रभाकर, उमाप्रकाश ओझा, रियाज अम्बर, पवन चंद्राकर, सुनील गणवीर, डॉ राकेश गुप्ता, संजीव खुदशाह, एल पी बनर्जी, पार्वती साहू, डॉ कल्पना, सगुण वर्मा, सीमा , निरूपा, रानी, आर के वर्मा, लक्ष्मीकांत अग्रवाल, दिलीप रा गा से, सविता सुखदेवे, रानी राजपूत, प्रशांत यादव, शिव कुमार, मिथुन बंजारे, साधना राठौर सम्मिलित हुए।
इस अवसर पर छत्तीसगढ़ तर्कशील परिषद और ब्रेकथ्रू साइंस सोसायटी द्वारा वैज्ञानिक विषयों पर पोस्टर प्रदर्शित किए गए। अंध श्रद्धा निर्मूलन समिति द्वारा विज्ञान पुस्तिकाओं का वितरण किया गया और लोगों को अंध विश्वास से मुक्त होने का आह्वान किया गया। तीन दिवसीय इस आयोजन में सोमवार को “वैज्ञानिक सोच विकसित करने में आने वाली समस्याएं” विषय पर दिल्ली के पत्रकार, लेखक और विज्ञान कार्यकर्ता चंद्रभूषण द्वारा व्याख्यान दिया गया। दूसरे दिन मंगलवार को ” महाराष्ट्र अंध श्रद्धा निर्मूलन समिति” के वरिष्ठ सदस्य पूर्व प्राचार्य डा मछिंद्रनाथ मुंडे और सुशीला मुंडे ने “भारत में वैज्ञानिक सोच की जरूरत” विषय पर विस्तार से बताया।
