रांची। अंधविश्वास एवं सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ अभियान के अंतर्गत डॉ. दिनेश मिश्र ने झारखंड प्रवास में जमशेदपुर सिगमेडा गोविंदपुर, बिस्टुपुर में जागरूकता अभियान संचालित किया। सामाजिक कार्यकर्ताओं, विद्यार्थियों से चर्चा की व व्याख्यान दिया.
निर्दोष महिलाओं को बचाने हर व्यक्ति आगे आए
जमशेदपुर में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि झारखंड में भी डायन प्रताड़ना, जादू टोने के सन्देह में महिलाओं की प्रताड़ना के अनेक मामले हैं। आर टी आई और अन्य माध्यमों से मुझे जानकारी मिली है कि झारखंड में 7 हजार से अधिक मामले डायन के सन्देह में महिला प्रताड़ना के हैं जिनमें से 1800 से अधिक महिलाओं की हत्या हुई है। अंधविश्वास एवं सामाजिक कुरीति के कारण होने वाली यह घटनाएं सभ्य समाज के लिए अत्यंत शर्मनाक है। निर्दोष महिलाओं को इस अंधविश्वास और प्रताड़ना से बचाने के लिए समाज के हर व्यक्ति को आगे आना चाहिए। डॉ. दिनेश मिश्र ने कहा देश के 17 प्रदेशों में अंधविश्वास, जादू टोने की मान्यता के कारण महिलाओ के साथ प्रताड़ना की घटनाएं घटती हैं और उनके मानवाधिकार हनन के मामले सामने आते है जो चिंतनीय है। झारखंड, बिहार, ओडिशा, असम, राजस्थान, हरियाणा छत्तीसगढ़ में ऐसी घटनाओं के समाचार अक्सर सुनाई पड़ते हैं।
देश के 17 राज्यों में टोनही-डायन के संदेह में होता है महिलाओं पर अत्याचार
डॉ मिश्र ने कहा कि महिला प्रताड़ना और उनके मानवाधिकार हनन के कारणों में एक प्रमुख कारण अंधविश्वास और डायन का संदेह भी है। समाचार माध्यमों और प्रत्यक्ष रूप से ऐसे मामलों की जानकारी मिलती रहती है। इससे पता चलता है कि महिलाओं के अधिकारों को लेकर किये जाने वाले दावों और वास्तविक स्थिति में बहुत फर्क है। महिला प्रताड़ना के अनेक मामलों में तो उन्हें इंसान ही नहीं समझा जाता और उन्हें मानव अधिकार देने के दावे झूठे साबित हो जाते हैं। प्रताड़ना इतनी अधिक कि अनेक महिलाओं की मृत्यु घटनास्थल पर हो जाती है। डॉ मिश्र ने कहा कि अशिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं और वैज्ञानिक जागरूकता की कमी ,गैर जरूरी परंपराओं का आंख मूंद कर पालन करने की आदत से न ही अंधविश्वास खत्म हो पाते हैं और न ही पीड़ितों को राहत मिल पाती है। देश के 17 प्रदेशों में डायन ,चुड़ैल ,जैसे अंधविश्वास के कारण होने वाली घटनाएं नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो में भी दर्ज होती रही हैं पर न जाने क्यों वे शासन प्रशासन की योजनाओं की प्राथमिकता की सूची में नहीं आ पातीं.
गला काट देते हैं, जिंदा जला देते हैं, पीटकर मार डालते हैं
डॉ मिश्र ने कहा झारखंड के 24 जिलों में सात हजार से अधिक मामले तथा 1800 से अधिक हत्या के मामले पुलिस में हैं जिनमें से गढ़वा जिले के 795, पलामू जिले के 299, हजारीबाग के 287, रांची जिले के112 मामले हैं. बाकी अन्य जिलों के भी सैकड़ों मामले हैं। गरीब परिवार , विधवा, परित्यक्ता, बेसहारा, महिलाएं ऐसी प्रताड़ना का शिकार अधिक हुई हैं । उनमें में 40 से 60 वर्ष की महिलाओं की संख्या अधिक है। डायन प्रताड़ना के मामलों में प्रताड़ना के तौर तरीके बड़े ही क्रूर हैं। हमने पाया है कि गला काटने, जिंदा जला कर मारने, चारों ओर से घेर कर पीटने से मौतें हुई हैं। वही इमली के डंडे से, पत्थर व हाथ पैर से मारने के भी मामले हैं। अनेक मामलों में तो किसी बैगा के कहने पर उन्हें आग का घेरा पार करने, बीमार को ठीक करने, मृतक को पुनर्जीवित करने को कहा गया और असफल होने पर उनके साथ बर्बरतापूर्ण व्यवहार किया गया जिसमें सिर के बाल काटने, मुंह काला करने, दांत तोड़ने, जीभ काटने, आंख फोड़ने जैसे अमानुषिक अत्याचार किये गए। कुछ मामलों में तो वे घटनास्थल पर रात भर पड़ी रहीं उनकी मृत्यु हो गयी तो कभी उन्हें अस्पताल भी ले जाने नहीं दिया गया। मेरा अनेक स्थानों पर जाना हुआ उनसे मुलाकात होती है, उनके परिजनों से बात होती है। वे बताते हैं कि ऐसी घटनाओं के बाद उनका गाँव मे रहना भी दूभर हो जाता है। लचकेरा की एक महिला तो सालों घर से बाहर नहीं निकली. उसे किसी भी इंसान से, किसी भी आवाज से डर लगता था, बहुत दिनों बाद नॉर्मल हो पाई।
बीमारियों की वजह जादू-टोना नहीं, बैक्टीरिया, वायरस और फंगस
डॉ मिश्र ने कहा अंधविश्वास दो प्रकार के हैं एक तो वे जो सामाजिक परंपराओं से जुड़ते गए और दूसरे जो बीमारियों और उनके इलाज को लेकर हैं। जादू टोना, भूत प्रेत, सूर्य ग्रहण, अमावस्या, नजर लगना, आँख फड़कना ,बिल्ली के रास्ता काटने, छींकने, दिशा शूल, ग्रहों के सम्बंध में शुभ अशुभ जैसी मान्यताएं हावी रहीं। वहीं दूसरे प्रकार के अंधविश्वास बीमारियों और उनके कारणों व उनके उपचार के सम्बंध में हैं। बीमारियों के कारण संक्रमण, कुपोषण और दुर्घटनाएं है जिनमे से संक्रमण बैक्टीरिया, फंगस, वायरस से होता है। कुपोषण से बचने के लिए सन्तुलित ,पौष्टिक आहार की आवश्यकता होती है। तथा दुर्घटनाओं से बचाव के लिए सावधानी ,सतर्कता जरूरी है। पर अंधविश्वास एवं भ्रम के कारण आज भी अनेक लोग बीमारियों का कारण जादू टोना, नजर लगना, तन्त्र, मन्त्र मानते हैं ,और इसी लिए उसके उपचार के लिए बैगा, गुनिया, झाड़ फूँक के फेर में आ जाते हैं। और बैगा के बहकावे में आकर अंधविश्वास में पड़कर गलत कार्यों को अंजाम देते हैं. जिससे डायन प्रताड़ना, बलि,ठगी, जैसी घटनाएं होती हैं।
हमारी संस्कृति महिलाओं को पूजने की
डॉ .मिश्र ने कहा कि हमारी संस्कृति में महिलाओं की पूजा करने की बात कही गयी है वहीं दूसरी ओर ऐसी घटनाएं निर्दोष महिलाओं के जीवन के लिए ही खतरा बन जाती हैं। डायन के संदेह में प्रताड़ना के निर्मूलन, उनके सामान्य मानवाधिकारों के हनन की रोकथाम के लिए सामाजिक जागरूकता अभियान चलाने, जनजागरण सभाएं करने, युवाओं और छात्रों को सम्मिलित करने, स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने व सक्षम कानून बना महिलाओं और सभी प्रताडितों के अधिकारों की रक्षा की जा सकती है। झारखंड में डायन प्रताड़ना निरोधक कानून भी है, जिसका पूरे ग्रामीण अंचल में प्रचार प्रसार करना, ग्राम पंचायतों में पोस्टर लगवाना आवश्यक है। डायन के सन्देह में प्रताड़ित महिलाओं के उपचार, मुआवजे, निवास, पुनर्वास, रोजगार, की व्यवस्था करने की आवश्यकता है। साथ ही ऐसे मामलों के लिए फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट बना कर महिलाओं को त्वरित न्याय दिलाने की जरूरत है। प्रदेश सरकार को डायन के संदेह में प्रताड़ित महिलाओं के अधिकारों और उनके जीवन की रक्षा के लिए ठोस पहल करने की आवश्यकता है ताकि झारखंड में डायन के सन्देह में प्रताड़ना बंद हों ,हत्याए रुकें प्रताडितों को राहत और न्याय मिल सके।
पिछले सप्ताह झारखंड प्रवास में आरंभ युवा मंच के विकास कुमार, अंकुर, प्रदीप से सिदगोड़ा लाइब्रेरी में डायन प्रताड़ना से संबंधित मामलों पर चर्चा हुई. अर्जक संघ के आर बी साहू के साथ छोटा गोविंदपुर , में बिष्टुपुर में ही सामाजिक कार्यकर्ता अर्पिता श्रीवास्तव तथा अनेक सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ, स्कूली बच्चों के साथ व्याख्यान सत्र हुए जिनमें अंधविश्वास निर्मूलन, वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर चर्चा हुई।
