रायपुर। आज रात होलिका दहन होगा और कल रंग खेला जाएगा। सब अपनी अपनी तैयारियों में लगे हैं। बाजार पिचकारी, रंग और गुलाल से सजा है। तरह तरह की टोपियां भी मिल रही हैं। और बाजे भी। इस बार होली पर पहनने के लिए सफेद टीशर्ट भी मिल रही हैं। यह शायद टीवी और फिल्मों का असर है। होली पर अलग अलग समाजों में, अलग अलग गांव कस्बों में कुछ न कुछ अलग परंपराएं हैं। वे इनके निर्वहन की तैयारी में हैं। पुलिस की अपनी तैयारी है। वह जनप्रतिनिधियों व समाजजनों की बैठक लेकर सहयोग की अपील कर रहे हैं। मर्यादा तोड़ने पर सख्ती की चेतावनी भी दी जा रही है। होलिका दहन करने वालों से अनुरोध किया जा रहा है कि डामर वाली सड़क पर होली न जलाएं। जलाना ही हो तो नीचे मुरम बिछा दें। वरना होली के बाद खराब सड़क से आना जाना करना पड़ेगा। स्कूल कालेजों में बच्चे होली खेल रहे हैं। यह सिलसिला पिछले कई दिन से चल रहा है। जगह जगह फाग गायन हो रहा है। हालांकि यह परंपरा कम होती जा रही है।
बालोद में गायत्री परिवार ने एक अनूठी पहल की है। वे होलिका दहन के अवसर पर अश्लील साहित्य व फोटो जलाएंगे। इसके लिए गायत्री परिवार के लोग वार्डों में घूमकर ऐसा साहित्य व फोटो मांगकर जमा करेंगे। होलिका दहन के रूप में इसे ही जलाया जाएगा।
दुर्ग जिले के धनोरा गांव में होली पर लकड़ी की जगह नारियल, कपड़े और नीबू की होली जलाते हैं। यहां एक दरबार है जिसका नाम बाबा दरबार धाम है। त्योहार के दिन बाघ की मूर्ति के पास लोग जमा होते हैं। पूजा पाठ करते हैं। नारियल, कपूरी पान, मिठाई, हार, कपूर, लाल चूनर व केसरिया झंडा चढ़ाते हैं। पूजा पाठ के बाद चकमक पत्थर से होली जलाई जाती है। इसमें पुराने कपड़े, नारियल व नीबू डाला जाता है।
बालोद जिले के चंदनदबिरही गांव में होलिका दहन नहीं होता। गीले रंग भी नहीं लगाए जाते। नगाड़े भी नहीं बजते। इसकी बजाय रामनाम सप्ताह का आयोजन होता है। राधा कृष्ण की मूर्ति की परिक्रमा की जाती है। दही लूट होती है। एक दूसरे को तिलक लगाया जाता है। गांव वालों की मान्यता है कि होलिका दहन न करने और रंग न खेलने से गांव विपत्तियों से बचता है। गांव के बुजुर्गों की मुताबिक यह परंपरा 1926 से चली आ रही है। गांव में एक समय छोटे बच्चों की असमय मौत होने लगी। तब गुंडरदेही के राजा निहाल सिंह के सुझाव पर यह परंपरा शुरू की गई। गांव वालों का कहना है कि इस परंपरा से पानी की बचत होती है। त्योहार पर छह हजार लीटर पानी की बचत हो जाती है। कई साल हो गए, गांव में जलसंकट नहीं आया है।
होली में कानून व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन के लिए शहर एक चुनौती होती है। क्योंकि कुछ लोग इसे मर्यादा तोड़ने के अवसर केर रूप में देखते हैं। ऐसी गतिविधियों को रोकने के लिए सभी चौक चौराहों पर पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया जा रहा है। जहां पिछली बार उपद्रव हुए, वहां अतिरिक्त बल लगाया जा रहाहै। लोगों से अपील की जा रही है कि त्योहार को भाईचारे के साथ मनाएं। किसी को जबरदस्ती रंग न लगाएं। नुकसानदेह केमिकल रंगों का उपयोग न करें। कीचड़ न फेंकें। शराब पीकर गाड़ी न चलाएं। मुखौटा न लगाएं। सक्ती में कई दुकानों से पुलिस ने मुखौटे जब्त किए हैं। पुलिस ने नंबर जारी कर रहा है कि कोई अप्रिय घटना हो तो पुलिस को सूचना दें। पुलिस लगातार गश्त भी करती रहेगी। नगरपालिका, नगर निगमों को भी इस त्योहार पर विशेष तैयारी करनी पड़ती है। इस दिन आम दिनों से ज्यादा पानी की जरूरत होती है। नगरीय निकायों से कहा गया है कि दिन में दो की जगह तीन बार पानी दें। और पानी की जरूरत पड़ने पर लोग टैंकर बुलवा सकते हैं। इसके लिए हेल्प लाइन नंबर जारी किए गए हैं। फायर ब्रिगेड को तैयार रहने कहा गया है। बिजली वालों को भी सतर्क किया गया है। पुलिस असामाजिक तत्वों को संकेत देने के लिए फ्लैग मार्च भी कर रही है। शराब की वजह से होने वाले विवादों को देखते हुए इस दिन शराब बिक्री पर रोक लगाई जाती है। अवैध शराब पर भी नजर रखी जाती है। शराबियों को पकड़ने के लिए जगह जगह पाइंट लगाए जाएंगे। पुलिस यह भी अपील कर रही है कि जबरन चंदा वसूली न करें। रास्ते में पत्थर या दूसरी बाधाएं न रखें। होलिका दहन बिजली और टेलीफोन के खंबों और तारों से दूर करें। बीच सड़क या चौराहे पर होली न जलाएं। सोशल मीडिया पर गलत सलत पोस्ट डालने के खिलाफ चेतावनी दी गई है।
फाग गायन की स्पर्धाएं जगह जगह हो रही हैं। गांव गांव से खबरें आ रही हैं। एक एक आयोजन में कई कई मंडलियां शामिल होती हैं। नगाड़ा बजाने वालों का कौशल देखते बनता है। फाग गायन शुरू होता है तो लोग खुद को थिरकने से रोक नहीं पाते। पारंपरिक गीतों के अलावा तरह तरह के विषयों पर फाग गीत रचे जाते हैं। जीतने वाली मंडलियों को पुरस्कृत किया जाता है।
बेमेतरा के बीजागोड़ गांव के प्रायमरी स्कूल में में बच्चों को होलिका और प्रहलाद की कहानी सुनाई गई। उनसे होली पर निबंध लिखने कहा गया। पेंटिंग भी बनवाई गई। होली मनाते समय सावधानी बरतने के बारे में बताया गया। बच्चे फाग के साथ झूमे भी। बच्चों को अपनी परंपराओं से जोड़े रखने के लिए यह एक अच्छी पहल कही जा सकती है।
भिलाई के जवाहर लाल नेहरू स्कूल ग्राउंड न्यू खुर्सीपार में गोबर के कंडों से होली जलाएंगे। सुबह भक्त प्रहलाद की पूजा होगी। रात 11.30 बजे होलिका दहन किया जाएगा। भगवान विष्णु की आरती के बाद होलिका की परिक्रमा की जाएगी। यहां प्रसाद के रूप में गेहूं की बाली और चना बूट को भूनकर दिया जाता है। दुर्ग के गंजपारा में 3 हजार कंडों और 3 किलो कपूर से होलिका दहन होगा। अन्य स्थानों पर फाग गीत, फूलों की होली, होली मिलन जैसे आयोजन होंगे।
जशपुर के आदिवासी इलाकों में एक परंपरा यह है कि होलिका दहन तो होता है लेकिन इसके दूसरे दिन रंग नहीं खेला जाता। तीन चार दिन बाद जब होली की राख अपने आप ठंडी हो जाती है तब रंग खेला जाता है। इससे पहले कोई होलिका दहन वाली जगह के आसपास नहीं जाता। माना जाता है कि लोग अपनी बुराइयों का दहन होलिका के साथ करते हैं। जब तक राख ठंडी न हो जाए, बुराइयां पूरी तरह खत्म नहीं होतीं। अगर कोई राख ठंडी होने से पहले वहां तक जाए तो बुराइयां उसके साथ लौट सकती हैं।
होली का रंग सब पर चढ़कर बोल रहा है। ऐसे में राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा कैसे चूकते। बलौदाबाजार में उन्होंने संघ के कार्यकर्ताओं के साथ होली खेली। खुद फाग गाया। उन्होंने इस त्योहार को प्रेम और सौहार्द के साथ मनाने की अपील की।
