हार्मोनी म्यूज़िकल ग्रुप और प्रयास म्यूजिकल ग्रुप के फाउंडर डायरेक्टर संजीव ठाकुर से महानदी न्यूज डॉट कॉम की बातचीत
हाल ही में रायपुर के मायाराम सुरजन हॉल में संगीत का एक जबरदस्त शो हुआ जिसमें शहर के चुनिंदा गायकों ने बॉलीवुड के नए पुराने गानों को अपनी आवाज दी। शाम साढ़े छह बजे शुरू हुआ नवगठित संस्था प्रयास का यह प्रोग्राम रात साढ़े ग्यारह बजे तक चला। श्रोता आखिरी तक कुर्सियों पर जमे रहे। देर देर तक बजती रही तालियों ने बताया कि श्रोताओं ने प्रयास के गायकों की गायकी को कितना पसंद किया। इस कामयाबी के पीछे संस्था के संस्थापक संजीव ठाकुर, अरुप मजूमदार और सुनील जार्ज की खास मेहनत रही। महानदी डॉट कॉम ने संजीव ठाकुर से रायपुर में संगीत के माहौल व इससे जुड़े कुछ मुद्दों पर बात की-
आप अपने बारे में संक्षेप में बताएं। आपकी पारिवारिक पृष्ठभूमि, आपका व्यवसाय, आपका जीवन संघर्ष…
मेरा जन्म रायपुर के डंगनिया में हुआ तब यह गांव था जो अब शहर में शामिल हो चुका है। स्कूलिंग सेंट पॉल हायर सेकेंडरी स्कूल से हुई। साइंस कॉलेज से बीएससी की। मेरी माता जी शासकीय स्कूल में शिक्षिका थीं और प्रधानअध्यापिका पद से रिटायर हुईं। पिता जी शिक्षा विभाग में संकुल समन्वयक के पद से रिटायर हुए। मैं पिछले 30 सालों से फार्मास्युटिकल कम्पनी में काम कर रहा हूं।
संगीत से आपका जुड़ाव कब कैसे हुआ? अपनी संगीत यात्रा के बारे में बताएं।
संगीत से लगाव मुझे अपने दादा जी से मिला। वे बहुत अच्छे बांसुरी वादक थे। पिताजी औऱ माताजी भी संगीत प्रेमी थे। भाई बहन सभी संगीत प्रेमी हैँ। मात्र 8 साल की उम्र से मैंने गायन औऱ वादन में दिलचस्पी लेना शुरू कर दिया था। इसी उम्र से मैंने नगाड़ा बजाना शुरू किया था, जिसका विधिवत ज्ञान मैंने किसी से नहीं लिया। केवल दूसरों को बजाते हुए देखकर ताल का ज्ञान प्राप्त किया. बचपन में टेबल बजाकर प्रैक्टिस करता था।
छठवीं क्लास में मुझे पिताजी ने सायकिल लेकर दी, क्योंकि मुझे घर से लगभग 5 किलोमीटर दूर सेंट पॉल स्कूल जाना था। उन दिनों गणेश औऱ दुर्गा पक्ष में शहर में ऑर्केस्ट्रा हुआ करते थे। स्कूल से आकर शाम को शहर में सभी गणेशोस्तव औऱ दुर्गाेत्सव समिति के पंडाल में जाकर पता करता था कि कहीं कोई प्रोग्राम तो नहीं। औऱ पता चलने पर रात को वहां पहुंचकर पूरा कार्यक्रम शुरू से अंत तक देखता था। 1990 में मैंने रायपुर के प्रसिद्ध गिटारिस्ट स्व. रोमियो जैकब सर से 2 साल गिटार सीखा। समयाभाव के कारण अब यह प्रैक्टिस में नहीं है। 2015 से 2021 तक मैंने कमला देवी संगीत महाविद्यालय से रेगुलर विद्यार्थी के रूप में इंडियन क्लासिकल म्यूज़िक(वोकल) में विद किया जो 6 वर्ष का कोर्स होता है। कमलादेवी संगीत महाविद्यालय में सारी कक्षाएं शाम 4 से 8 बजे तक लगती हैं। ये मैंने अपने जॉब के साथ साथ किया। इसी बीच एक साल मैंने कमलादेवी संगीत महाविद्यालय के सितार विभाग से रिटायर्ड आरके पटेल सर से सितार सीखा पर ज़्यादा समय नहीं दे पाया। ऐसा कोई दिन नहीं होता जब मैं बिना कोई गाना सुने सो जाऊं। संगीत से मुझे अटूट लगाव है।
प्रयास संस्था की स्थापना के बारे में बताएं, यह कैसे हुआ?
प्रयास म्यूज़िकल ग्रुप के निर्माण की भी अपनी एक कहानी है।
मैं मैथिल ब्राह्मण समाज से सम्बन्ध रखता हूं। हमारे समाज का एक “हार्मोनी म्यूज़िकल” ग्रुप है। इसका भी फाउंडर और डायरेक्टर मैं ही हूं. मैंने समाज में इस ग्रुप के कई कार्यक्रम किए। पिछले साल 18 मई 2024 को हमने मायाराम सुरजन हॉल में हार्मोनी ग्रुप का पहला कार्यक्रम समाज से बाहर किया। हमारे इस कार्यक्रम को सारे श्रोताओं ने बहुत ज़्यादा पसंद किया। कार्यक्रम के कुछ दिनों बाद से ही लोग पूछने लगे थे कि आपका अगला कार्यक्रम कब है।
मायाराम सुरजन हॉल मे जहाँ हर शनिवार औऱ रविवार को किसी न किसी म्यूज़िकल ग्रुप के कार्यक्रम होते ही रहते हैँ जिनमें मैं नियमित श्रोता के रूप में जाता हूं। वहां बहुत से लोग संगीत में रुचि रखते हैँ औऱ ग़ायक भी हैँ। वे मुझसे हार्मोनी ग्रुप में जुड़ने की इक्छा ज़ाहिर करने लगे। हार्मोनी ग्रुप हमारे समाज का है, औऱ इसमें मैं समाज से बाहर के गायक ले नहीं सकता था. ये मेरी मज़बूरी थी। इसलिए मैंने सोचा एक अलग से ग्रुप बनाया जाए, जिसमें समाज से बाहर के गायकों को भी शामिल कर सकूँ। औऱ इस प्रकार प्रयास ग्रुप की स्थापना हुई। इसमें मेरे पुराने मित्र अरुप मजूमदार और सुनील जार्ज सहभागी हैं. सुनील कालेज में साथ पढे और हमारा प्रोफेशन भी एक है. अरुप भी इसी प्रोफेशन में हैं और हम लोग पिछले कई बरस से साथ हैं.
कृपया इस कार्यक्रम की तैयारियों के बारे में बताएं।
किसी भी कार्यक्रम को करने के पहले बहुत मेहनत करनी होती है। जैसे-जहाँ कार्यक्रम करने जा रहे हैँ वहां के श्रोताओं की पसंद कैसी है? वे किस दौर के गीत सुनना पसंद करते हैँ? गायक जो गीत अपनी प्रस्तुति के लिए पसंद कर रहे हैँ उस गीत में उनकी आवाज़ का टेक्सचर मूल गीत के गायक से कितना परसेंट मिल रहा है? गीत में जो हरकतें हैँ उन्हें गायक कितने अच्छे से ले रहे हैँ? गीत का मूड कितना मेंटेन रखा जा रहा है? गीत में फीलिंग्स कितनी डाली जा रही है?
इसके अलावा कार्यक्रम के दिन ग्रुप के सभी सदस्यों को अपने आप को कैसे प्रेजेंट करना है। मसलन उनकी ड्रेसिंग, गाते समय उनकी बॉडी लैंग्वेज, श्रोताओं के साथ स्टेज में आते ही औऱ गाने खत्म होने के बाद उनका श्रोताओं के साथ व्यवहार, अभिवादन, गाते समय श्रोताओं के साथ आई कॉन्टेक्ट, इन सभी बातों पर भी मैं बहुत ध्यान देता हूं। इन्ही सब बातों का ध्यान रखकर मैंने दोनों ही ग्रुपों में गायक कलाकारों से प्रैक्टिस करवाई। परिणाम सामने है। “प्रयास म्यूज़िकल ग्रुप ” के कार्यक्रम को भी लोगों ने हार्मोनी म्यूज़िकल ग्रुप के कार्यक्रम की तरह प्यार औऱ आशीर्वाद दिया। गायकों की ग़ायकी को बहुत सराहा गया।
मायाराम सुरजन हॉल, म्यूजिक सिस्टम लगाने वाली संस्था, यू ट्यूब पर इसे लाइव प्रसारित करने वालों के बारे में क्या कहना चाहेंगे?
मायाराम सुरजन हॉल में अगर साउंड सिस्टम की बात करें तो हर म्यूज़िकल ग्रुप की पहली पसंद स्वर माला साउंड सिस्टम है, इसके अलावा टीकम साउंड सर्विस, एनी वेन साउंड सर्विस भी वहां अपनी सेवाएं देते हैँ। यूट्यूब लाइव का अभी कुछ महीनों पहले क्रेज बढ़ा है। इसे इंट्रोड्यूस करने वाले प्रदीप साहू जी हैँ, जो फ़िल्मी गीतों, ग़ज़लों के कराओके ट्रेक भी बनाते हैँ। वे संगीत ग्रुप्स की पहली पसंद हैँ। उनके अलावा अभी अभी नवीन भागीरथी जी ने भी यूट्यूब लाइव शुरू किया है। दोनों का काम बहुत अच्छा है और सभी संगीत ग्रुप्स से उन्हें अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है। यूट्यूब लाइव से ये फायदा है कि हमारे जो परिचित, दोस्त, रिश्तेदार किसी कारणवश मायाराम सुरजन हॉल में उपस्थित नहीं हो पाते, वे यूट्यूब लिंक के माध्यम से घर से ही कार्यक्रम को लाइव देख सकते हैँ। दूसरा फायदा ये है की कार्यक्रम की प्रस्तुति यूट्यूब में लाइव प्रसारण करने वाले कुछ दिनों बाद सभी गायकों के गीतों को सेप्रेट करके उन्हें एमपी 4 में उपलब्ध करा देते हैँ जिससे गायक अपने गीतों को सुरक्षित रख सकते हैँ। औऱ लिंक तो लाइफ टाइम रहता ही है, हम कभी भी अपने प्रोग्राम को पुनः देख सकते हैँ।
शहर के श्रोताओं के बारे में क्या कहना चाहेंगे?
जहाँ तक शहर के श्रोताओं की बात है, रायपुर शहर में संगीत प्रेमी बड़ी शिद्दत से सुनते हैँ। हॉल में उपस्थित होने वाले सभी श्रोता कान के पक्के हैँ औऱ उनका सांगीतिक ज्ञान भी बहुत ही अच्छा है। वे गायकों की छोटी मोटी ग़लतियों को दरकिनार करके उन्हें बहुत प्रोत्साहित करते हैँ। आज जो अच्छे गायक हैँ वे इन्ही श्रोताओं के प्यार, आशीर्वाद औऱ उनके द्वारा की गयी प्रशंसा की वजह से एक अलग मुकाम पर हैँ। क्योंकि श्रोता नहीं तो गायक कलाकार का भी कोई वजूद नहीं। इसी का परिणाम है कि आज रायपुर शहर में एक से बढ़कर एक शानदार गायक हैँ। संगीत के क्षेत्र में अन्य जिलों की अपेक्षा रायपुर जिला बहुत आगे है।
भविष्य की क्या योजनाएं हैं?
भविष्य में मेरी योजना है अपने दोनों ग्रुप के कलाकारों को रायपुर शहर में एक अच्छी पहचान दिलाना। अच्छे अच्छे गायक गायिकाओं की ख़ोज करना, उन्हें प्लेटफार्म देना औऱ शहरवासियों को अपने कार्यक्रम के जरिये एक उत्कृष्ट संगीतमय वातावरण देना। उम्दा गायक कलाकारों को लेकर भविष्य में लाइव बैंड के साथ शहर के बड़े संगीत हॉल में म्यूज़िक प्रोग्राम करने की भी योजना है जहाँ ज़्यादा से ज़्यादा श्रोता आ सकें।
