धमतरी जिले के उमरादेहान गांव में लगाई राममनोहर लोहिया की प्रतिमा
उमरादेहान, धमतरी। वरिष्ठ समाजवादी नेता रघु ठाकुर ने यहां कहा कि देश के आदिवासियों को यदि आजीविका के लिए जमीन के पट्टे दे दिए जायें तो जंगल भी सुरक्षित होंगे और वन्यजीवों की रक्षा भी हो जायेगी। देश में इक्कीस लाख भूमिहीन आदिवासी हैं। इनकी समस्याओं को लेकर जल्दी ही दिल्ली में अभियान शुरू किया जाएगा। रघु ठाकुर ने आज उमरादेहान में डा. राममनोहर लोहिया की प्रतिमा के अनावरण के अवसर पर यह बात कही। नगरी सिहावा अंचल के आदिवासियों ने एक- एक किलो धान इकठ्ठा कर यह प्रतिमा तैयार कराई है।
पूर्व विधायक अरुण वोरा, अमृत संदेश के प्रधान संपादक राजीव वोरा भी इस अवसर पर विशेष रूप से उपस्थित हुए। रघु ठाकुर ने कहा कि उमरादेहान अहिंसा का तीर्थ है। सत्तर साल पहले डॉ लोहिया ने यहीं से आदिवासियों के भूमि के अधिकार का आन्दोलन शुरू किया। वनग्रामों को राजस्व ग्राम जैसी सुविधाएं देने की मांग यहीं से उठी। इस अंचल की चार पीढ़ियों ने अपने अधिकारों के लिए जेल की यात्रा करके यह बता दिया कि दुनिया को बदलने का सबसे बड़ा माध्यम जेल है, बंदूक या हिंसा नहीं। नगरी सिहावा अंचल हिंसाग्रस्त वनांचल में अहिंसा के टापू की तरह है। नक्सली हिंसा में दोनों तरफ से आदिवासी ही मर रहे हैं। सरकार को भी समझना होगा कि बंदूक की गोली से हिंसा तो मर सकती है, पर विचार नहीं। नगरी सिहावा अंचल के उमरादेहान जैसे गांवों से देश में यह संदेश जाना चाहिए।
रघु ठाकुर ने कहा कि नगरी सिहावा के ऐतिहासिक आंदोलन को स्कूल कालेज के पाठ्यक्रम में शामिल किया जाना चाहिए जिससे आने वाली पीढ़ी को अहिंसक आंदोलन की प्रेरणा मिले। उन्होंने कहा भारत की राजनीति और समाजवादी आन्दोलन को 1990 के बाद आये एनजीओ ने बड़ा नुकसान पहुंचाया है। जनतंत्र, अहिंसा , सविनय अवज्ञा और आन्दोलन से देश आगे बढ़ रहा है। हमें ऐसा विकास नहीं चाहिए जो अमीरी के टापू खड़े करे। आदिवासी समाज में कभी बलात्कार की घटनाएं सुनने को नहीं मिलेंगी। इससे बड़ा सभ्यता का पैमाना क्या हो सकता है।
डॉ लोहिया ने यहां से जो आंदोलन शुरू किया उसमें आदिवासी नेता सुखराम नागे की पुलिस हिरासत में मौत हुई। आज उनकी याद में एक शैक्षणिक संस्थान है। नगरी सिहावा के आदिवासियों की चार पीढ़ियों ने अनाम रहकर खुद को आंदोलन में झोंका। जेल यात्राओं के दौरान कभी किसी ने माफी नहीं मांगी। ठाकुर ने कहा आदिवासी क्षेत्रों में अगर उद्योग लगते हैं तो स्थानीय आदिवासियों को पच्चीस फीसदी अंशधारी व लाभ का हिस्सेदार बनाया जाना चाहिए तथा उनकी भागीदारी होनी चाहिए। इस मुद्दे को लेकर आगामी समय में आन्दोलन किए जायेंगे।
समारोह में हर राजनीतिक विचारधारा से जुड़े लोग दूर दूर से आये थे। लोकतांत्रिक समाजवादी पार्टी के जिला अध्यक्ष शिव नेताम, कौआ बहरा की सरपंच राधिका नेताम व स्थानीय आदिवासियों के प्रयास से हुए आज के समारोह में बड़ी संख्या में महिलाएं बारिश में बैठी रहीं। उमरादेहान की सभा में सम्मिलित होने बस्तर में कोंडागांव- नारायणपुर व कांकेर से भी बड़ी संख्या में लोग आये जो इस समय हिंसाग्रस्त है। बस्तर के लोगों ने कहा है कि वे नगरी सिहावा आन्दोलन से प्रेरणा लेने तो आये ही हैं, रघु ठाकुर को भी बस्तर बुलाना चाहते हैं जिससे यहां के परिवेश में शांति की वापसी हो सके।
