श्रीअग्रसेन धाम में जीवन विद्या परिचय शिविर का समापन
जनवरी में शिविर का होगा अगला चरण
रायपुर, 14 अक्टूबर 2025। मध्यस्थ दर्शन पर आधारित जीवन विद्या परिचय शिविर का परिवार और पति-पत्नी संबंधों के महत्व पर चर्चा के साथ समापन हुआ। प्रबोधक श्री सोमदेव त्यागी ने कहा कि बच्चे बहुत सारे सवाल पूछते हैं। पर मां-बाप उसकी जिज्ञासा को नहीं समझ पाते या सही उत्तर नहीं दे पाते। यदि परिवार में मां-बाप और सगे संबंधी बच्चे को ज्ञान और समझदारी का बेहतर वातावरण दें तो बच्चा जीवन में हर क्षेत्र की परम ऊंचाई को पा सकता है।
आचरण देखकर बच्चे सीखते हैं श्री त्यागी ने कहा कि वर्तमान परिवेश में देखते हैं कि जो किसान के घर पैदा होता है वह किसानी का हुनर सीख ही जाता है। जिसे परिवार में शिक्षा का वातावरण मिलता है वह अच्छी पढ़ाई कर लेता है। जो व्यापारी के घर पैदा होता है वह उस व्यवसाय को बहुत आगे तक ले जाता है। बस उसे परिवार और समाज में अच्छा वातावरण देने की जरूरत है। किसी भी बच्चे के विकास करने की कोई सीमा नहीं होती है। प्राचीन काल से आज तक देखें तो बच्चा मां-बाप से योग्य ही बनता है। यदि बच्चे को अधिकतम सीमा तक पहुंचाना है तो मां-बाप को उस आचरण के साथ जीना होगा। उसके आचरण को देखकर ही बच्चे आगे बढ़ते हैं।
बच्चे पालकों को लड़ते देखते हैं उन्होंने कहा कि एक बच्चे का मानसिक विकास पांचवी कक्षा तक हो जाता है। इस उम्र में वे परिवार के लोगों का अनुकरण-अनुशरण करते हैं। आज के बच्चे मनमानी करने लगे हैं, क्योंकि बच्चे मां-बाप को शिकायत करते हुए देखते हैं। झगड़ते हुए देखते हैं। बच्चों को उनमें श्रेष्ठ गुण नहीं दिखते हैं, इसलिए वह मनमानी करने लगते हैं। परिवार एक इंसान रचने की फैक्टरी बन सकता है एक भगवान बनाने की फैक्टरी बन सकता है। विवाह मानव के जीवन का सबसे बड़ा उत्सव बन सकता है। परिवार बच्चों को पूर्ण बनाने की संस्था है।
परिजनों को नई दिशा मिली सात दिन तक चले इस शिविर में अभ्युदय संस्थान अछोटी और श्री अग्रवाल सभा का विशेष योगदान रहा। आयोजन प्रमुख डॉ. संकेत ठाकुर ने कहा कि श्री त्यागी 16 राज्यों में 400 से अधिक शिविर ले चुके हैं। रायपुर के इस आयोजन को हमारी नई पीढ़ी ने पूरा किया। अब जीवन विद्या शिविर का अगला चरण 18 से 25 जनवरी के बीच होगा। श्री मंजीत सिंह ने कहा कि मध्यस्थ दर्शन के प्रणेता ए नागराज के चेतना विकास मूल्य शिक्षा पर आधारित इस शिविर से आचरण में बदलाव आता है। यह जीने का नया विकल्प है, जिसे सीधे जीवन में उतारा जा सकता है। अभिभावक विद्यालय रायपुर की अध्यापिका अनिता शाह ने कहा कि इस शिविर से बहुत सारे परिजनों को जीने की नई दिशा मिली है। इस क्रम को जारी रखते हुए अब साप्ताहिक गोष्ठी का भी आयोजन किया जाएगा। इस आयोजन में राजा गड़ोदिया, आकाश मिश्रा, चंद्रशेखर राठौर, सूर्यकांत अग्रवाल, राकेश कंवर, प्रतीक शाह, जैनेंद्र जैन, साकेत शाह, हर्ष जैन, वेदांत अग्रवाल, सीए नवल देवांगन का विशेष योगदान रहा।